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रूसल प्रकृति (काव्य संग्रह) : डॉ. शुभ कुमार वर्णवाल

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RUSAL PRAKRIT  Anthology of Maithili Poems by Dr. Shubh Kumar Baranwal   प्रकाशक : पल्लवी प्रकाशन  तुलसी भवन , जे.एल.नेहरू मार्ग , वार्ड नं. 06, निर्मली जिला- सुपौल , बिहार : 847452   वेबसाइट : http://pallavipublication.blogspot.com ई-मेल : pallavi.publication.nirmali@gmail.com मोबाइल : 6200635563; 9931654742     प्रिन्ट : मानव आर्ट , निर्मली (सुपौल) आवरण : श्रीमती पुनम मण्डल , निर्मली ( सुपौल ),  बिहार : 847452 फोण्ट सोर्स : https://fonts.google.com/ , https://github.com/virtualvinodh/aksharamukha-fonts     दाम : 300 / - (भा.रू.) सर्वाधिकार © डॉ० शुभ कुमार वर्णवाल  पहिल संस्करण : 2022  ISBN :  978-93-93135-23-0  पोथीक सर्वाधिकार सुरक्षित अछि। कॉपीराइट © धारकक लिखित अनुमतिक बिना पोथीक कोनो अंशक छाया प्रति एवं रिकॉडिंग सहित इलेक्‍ट्रॉनिक अथवा यांत्रि‍क , कोनो माध्यमसँ अथवा ज्ञानक संग्रहण वा पुनर्प्रयोगक प्रणाली द्वारा कोनो रूपमे पुनरुत्पादित अथवा संचारित - प्रसारित नहि कएल जा सकैत अछि।  

बदलैत गाम (काव्य संग्रह) डॉ. शुभ कुमार वर्णवाल

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BADLAIT GAM  Anthology of Maithili Poems by Dr. Shubh Kumar Baranwal   प्रकाशक : पल्लवी प्रकाशन  तुलसी भवन , जे.एल.नेहरू मार्ग , वार्ड नं. 06, निर्मली जिला- सुपौल , बिहार : 847452   वेबसाइट : http://pallavipublication.blogspot.com ई-मेल : pallavi.publication.nirmali@gmail.com मोबाइल : 6200635563; 9931654742     प्रिन्ट : मानव आर्ट , निर्मली (सुपौल) आवरण : श्रीमती पुनम मण्डल , निर्मली ( सुपौल )  बिहार : 847452 फोण्ट सोर्स : https://fonts.google.com/ , https://github.com/virtualvinodh/aksharamukha-fonts     दाम : 300 / - (भा.रू.) सर्वाधिकार © डॉ० शुभ कुमार वर्णवाल  पहिल संस्करण : 2022  ISBN :  978-93-93135-22-3  ऐ पोथीक सर्वाधिकार सुरक्षित अछि। कॉपीराइट © धारकक लिखित अनुमतिक बिना पोथीक कोनो अंशक छाया प्रति एवं रिकॉडिंग सहित इलेक्‍ट्रॉनिक अथवा यांत्रि‍क , कोनो माध्यमसँ अथवा ज्ञानक संग्रहण वा पुनर्प्रयोगक प्रणाली द्वारा कोनो रूपमे पुनरुत्पादित अथवा संचारित - प्रसारित नहि कएल जा सकैत अछि।  

मोनक पौती (अनूदित उपन्यास) : डॉ. कमला चौधरी

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MONAK PAUTI : Maithili translation by Kamla Chaudhary of Gyanpith awarded authoress Aashapurna Devi’s Bengali prominent novelette ‘Moner Jhanpi, Pallavi Parkashan, Berma/Nirmali, Bihar, 2022, ₹ 200  ISBN : 978-93-93135-12-4 © डॉ. कमला चौधरी प्रथम संस्करण : 2022 मूल्य : ₹ 200 ( दू सय टाका) मात्र   प्रकाशक : पल्लवी प्रकाशन  तुलसी भवन , जे.एल.नेहरू मार्ग , वार्ड नं. 06, निर्मली जिला- सुपौल , बिहार : 847452 वेबसाइट : http://pallavipublication.blogspot.com ई-मेल : pallavi.publication.nirmali@gmail.com मोबाइल : 6200635563; 9931654742     आवरण सज्जा : श्रीमती पुनम मण्डल , निर्मली ( सुपौल )  बिहार : 847452   मुद्रक : मानव आर्ट , निर्मली (सुपौल)  

श्री जगदीश प्रसाद मण्डलक उद्बोधन-

प्रस्तुत अछि श्री जगदीश प्रसाद मण्डलक उद्बोधन अवसरि- शकुनतला-भुवनेश्वरी मैथिली-संस्कृत संवर्द्धन न्यास, हैदराबाद द्वारा आयोजित पुरस्कार वितरण समारोहक आयोजन दिनांक 24.11.2022क दिनक अढ़ाइ बजेसँ आरम्भ भ’ साँझक साढ़े छह बजे सम्पन्न भेल। ई समारोह जगन्नाथपुर (पुर्णिया) मे देसिल वयनाक सम्पादक श्री चन्द्रमोहन कर्णजीक निज आवासपर आयोजित छल। कार्यक्रमक विवरण निम्न अछि- पुरस्कार वितरण समारोह :- मुख्य अतिथि : श्री बुद्धिनाथ झा विशिष्ट अतिथि : श्री जगदीश प्रसाद मण्डल पुरस्कार विजेता : डॉ. महेन्द्र, डॉ. शिवशंकर श्रीनिवास, श्री अशोक, डॉ. उमेश मण्डल तथा श्री अरुण कुमार झा ‘अरूण’ निर्णायक मण्डल : श्री लक्ष्मण झा सागर, श्री चन्द्रेश एवं श्री केदार कानन मंच- संचालन : श्री किसलय कृष्ण कार्यक्रमक रूप-रेखा- गोसाउनिक गीत उपर्युक्त सभ अतिथि लोकनिक पाग-डोपटासँ स्वागत दीप प्रज्जवलन श्री केदार कानन द्वारा स्वागत भाषण मुख्य न्यासी श्री चन्द्र मोहन कर्णक उद्बोधन पॉंचो पुरस्कार विजेता लोकनिकेँ प्रशस्ति-पत्र द्वारा सम्मानित करब श्री चन्द मोहन कर्णक काव्य संग्रह ‘माँ-बाबूजी’क लोकार्पण आ श्री कर्णक पोथी-सम्बन्धी उद्गा

श्री जगदीश प्रसाद मण्डल

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श्री जगदीश प्रसाद मण्डलजीक जन्म मधुबनी जिलाक बेरमा गाममे 5 जुलाई 1947 इस्वीमे भेलैन। मण्डलजी हिन्दी एवं राजनीति शास्त्रमे एम.ए.क अहर्ता पाबि जीवि‍कोपार्जन हेतु कृषि कार्यमे संलग्न भऽ रूचि पूर्वक समाज सेवामे लागि गेला। समाजमे व्याप्त रूढ़िवादी एवं सामन्ती व्यवहार सामाजिक विकासमे हिनका वाधक बुझि पड़लैन। फलत: जमीन्दार , सामन्तक संग गाममे पुरजोर लड़ाइ ठाढ़ भऽ गेलैन। फलत: मण्डलजी अपन जीवनक अधिकांश समय केस-मोकदमा , जहल यात्रादिमे व्यतीत केलाह। 2001 इस्वीक पछाइत साहित्य लेखन-क्षेत्रमे एला। 2008 इस्वीसँ विभिन्न पत्र-पत्रिकादिमे हिनक रचना प्रकाशित हुअ लगलैन। गीत , काव्य , नाटक , एकांकी , कथा , उपन्यास इत्यादि साहित्यक मौलिक विधामे हिनक अनवरत लेखन अद्वितीय सिद्ध भऽ रहलैन अछि। अखन धरि दर्जन भरि नाटक/एकांकी , पाँच साएसँ ऊपर गीत/काव्य , उन्नैस गोट उपन्यास आ साढ़े आठसाए कथा-कहानीक संग किछु महत्वपूर्ण विषयक शोधालेख आदिक पुस्तकाकार , साएसँ ऊपर ग्रन्थमे प्रकाशित छैन। मिथिला-मैथिलीक विकासमे श्री जगदीश प्रसाद मण्डलजीक योगदान अविस्मरणीय छैन। ई अपन सतत क्रियाशीलता ओ रचना धर्मिताक लेल विभिन्न संस्थासभक द्